हर दिन हज़ारों महिलाएं इंटरनेट पर “pcod pcos kya hota hai” टाइप करती हैं। कोई डॉक्टर के पास जाने से पहले समझना चाहती है, कोई अपनी रिपोर्ट देखकर घबरा गई है, और कोई बस इतना जानना चाहती है कि यह नाम सुनकर डरना चाहिए या नहीं।
जवाब यह है: डरने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन अनदेखा करने की भी नहीं।
PCOD और PCOS भारत में महिलाओं को होने वाली सबसे आम हॉर्मोनल समस्याओं में से हैं। Indian Journal of Medical Research में प्रकाशित शोध के अनुसार, भारत में PCOS की दर 3.7 से 22.5 प्रतिशत के बीच है, यानी हर 10 में से एक या उससे ज़्यादा महिला इससे प्रभावित हो सकती है।
वापी, वलसाड, दमन, नवसारी और सिलवासा की महिलाओं में भी यह समस्या बड़ी संख्या में देखी जाती है। iSHA Women’s Hospital में हर हफ्ते दर्जनों मरीज़ इसी के लिए आती हैं। और उनमें से ज़्यादातर के लिए सबसे पहला सवाल यही होता है कि PCOD और PCOS असल में होते क्या हैं।
यह लेख उसी सवाल का जवाब है, पूरी तरह और सरल भाषा में।
PCOD और PCOS क्या होता है: बुनियादी अंतर पहले समझें
बहुत से लोग PCOD और PCOS को एक ही चीज़ मानते हैं। दोनों नाम मिलते-जुलते हैं, दोनों ovaries से जुड़े हैं, और दोनों में पीरियड की गड़बड़ी होती है। लेकिन ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं।
PCOD क्या होता है
PCOD का पूरा नाम है Polycystic Ovarian Disease, यानी बहुकोशिकीय डिम्बग्रंथि रोग।
इसमें ovaries (अंडाशय) में बहुत सारे अधपके अंडे जमा हो जाते हैं जो छोटी-छोटी cysts (गांठें) बना लेते हैं। ये अंडे ठीक से mature नहीं होते, इसलिए release भी नहीं होते। नतीजा: पीरियड देरी से आता है या अनियमित हो जाता है।
PCOD एक lifestyle condition के करीब है। सही खान-पान, वज़न नियंत्रण और कुछ दवाओं से इसे काफी हद तक control किया जा सकता है।
PCOS क्या होता है
PCOS का पूरा नाम है Polycystic Ovarian Syndrome, यानी बहुकोशिकीय डिम्बग्रंथि सिंड्रोम।
यह PCOD से ज़्यादा गंभीर हॉर्मोनल विकार है। इसमें ovaries न सिर्फ cysts बनाती हैं, बल्कि शरीर में androgens (पुरुष हॉर्मोन) का स्तर भी बढ़ जाता है। यह ओव्यूलेशन को बाधित करता है, fertility को प्रभावित करता है, और metabolism पर भी असर डालता है।
PCOS में insulin resistance, type 2 diabetes का खतरा, और heart health पर दीर्घकालिक असर हो सकता है। यह सिर्फ ovaries की बीमारी नहीं, पूरे शरीर का हॉर्मोनल असंतुलन है।
PCOD और PCOS में फर्क एक नज़र में

- PCOD: Ovaries में cysts, मुख्यतः lifestyle कारण, उपचार से काफी सुधार संभव, fertility पर सीमित असर
- PCOS: Cysts के साथ androgens भी बढ़े हुए, hormonal syndrome, fertility पर ज़्यादा असर, long-term management ज़रूरी
दोनों में पीरियड की गड़बड़ी, वज़न बढ़ना, और बाल झड़ना जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन PCOS का असर ज़्यादा गहरा होता है।
PCOD और PCOS के लक्षण: शरीर क्या-क्या संकेत देता है
दोनों स्थितियों में लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। कुछ महिलाओं में सारे लक्षण एक साथ होते हैं, कुछ में सिर्फ एक या दो। यही वजह है कि PCOD/PCOS की पहचान करना अक्सर देर से होती है।
पीरियड से जुड़े लक्षण
- पीरियड 35 दिन से ज़्यादा अंतर पर आना
- साल में 8 से कम बार पीरियड आना
- पीरियड बहुत हल्का या बहुत भारी होना
- कई महीनों तक पीरियड न आना
शरीर और त्वचा पर लक्षण
- चेहरे, ठुड्डी, पेट, या पीठ पर अनचाहे बाल (hirsutism)
- मुंहासे जो साधारण उपायों से ठीक न हों
- बाल पतले होना या सिर से बाल झड़ना
- गर्दन, बगल, या जांघों पर काली धारियां (acanthosis nigricans, insulin resistance का संकेत)
- वज़न बढ़ना, खासकर पेट के आसपास
प्रेगनेंसी और fertility से जुड़े लक्षण
- गर्भधारण में कठिनाई
- बार-बार गर्भपात
- ओव्यूलेशन न होना या अनियमित होना
अन्य लक्षण जो अक्सर नज़रअंदाज़ होते हैं
- लगातार थकान महसूस करना
- मूड में अचानक बदलाव, चिड़चिड़ापन, या depression
- नींद में समस्या
- सिरदर्द
PCOS के लक्षण आमतौर पर late teens या early twenties में शुरू होते हैं और बिना इलाज के बिगड़ते जाते हैं। इसलिए जितनी जल्दी पहचान हो, उतना बेहतर।
PCOD और PCOS क्यों होता है: पांच मुख्य कारण
अभी तक कोई एक कारण नहीं है जो हर महिला में PCOD या PCOS पैदा करे। यह आमतौर पर कई कारणों का मिलाजुला असर होता है।
1. Insulin Resistance: सबसे बड़ा कारण
PCOS से पीड़ित 70% तक महिलाओं में insulin resistance पाई जाती है। इसका मतलब है कि शरीर की कोशिकाएं insulin के संकेत को ठीक से नहीं समझ पातीं। इससे pancreas और ज़्यादा insulin बनाता है, जो ovaries को androgens (पुरुष हॉर्मोन) ज़्यादा बनाने के लिए प्रेरित करता है।
यह androgen का अधिक होना ही ओव्यूलेशन को रोकता है और PCOS के ज़्यादातर लक्षणों की जड़ है।
Journal of Ovarian Research में प्रकाशित शोध के अनुसार, insulin resistance PCOS का सबसे प्रमुख pathophysiological factor है और इसे target करने वाला इलाज सबसे कारगर साबित होता है।
2. Hormonal Imbalance: LH और FSH का असंतुलन
सामान्य cycle में LH (Luteinizing Hormone) और FSH (Follicle Stimulating Hormone) का अनुपात संतुलित रहता है। PCOS में LH की मात्रा FSH से ज़्यादा हो जाती है, जिससे ओव्यूलेशन नहीं होता और ovaries cysts बनाने लगती हैं।
3. Inflammation: शरीर में अंदरूनी सूजन
PCOS से पीड़ित महिलाओं में low-grade chronic inflammation देखी गई है। यह inflammation androgen production को और बढ़ाती है, जिससे एक दुष्चक्र बन जाता है।
4. Genetics: परिवार में है तो खतरा ज़्यादा
अगर आपकी मां, बहन, या नानी/दादी को PCOD या PCOS थी, तो आपको होने की संभावना ज़्यादा है। यह अनुवांशिक रूप से पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकता है।
5. Lifestyle कारण: बदली हुई दिनचर्या
अनियमित नींद, ज़्यादा processed food, बैठे रहने की आदत, तनाव, और मोटापा ये सभी PCOD/PCOS को बिगाड़ते हैं। खासकर दक्षिण गुजरात के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में, जहां जीवनशैली तेज़ी से बदल रही है, युवा महिलाओं में यह समस्या बढ़ रही है।
PCOD और PCOS का पता कैसे चलता है: कौन से टेस्ट होते हैं
PCOD/PCOS की कोई एक जांच नहीं होती। डॉक्टर कई चीज़ें मिलाकर diagnosis करते हैं।
Ultrasound (Sonography)
Pelvic ultrasound में ovaries देखी जाती हैं। अगर एक या दोनों ovaries में 12 से ज़्यादा छोटी follicles (2-9mm) दिखें या ovary का size बढ़ा हुआ हो, तो यह PCOS का एक संकेत है। लेकिन सिर्फ ultrasound से PCOS confirm नहीं होता।
Blood Tests: Hormone Panel
डॉक्टर खून की जांच में ये देखते हैं:
- LH और FSH: अनुपात की जांच
- Testosterone और DHEAS: androgen level
- Prolactin: दूसरी हॉर्मोनल समस्याओं को rule out करने के लिए
- TSH (Thyroid): thyroid को बाहर करने के लिए
- AMH (Anti-Müllerian Hormone): ovarian reserve और PCOS दोनों के लिए
- Fasting Insulin और Blood Sugar: insulin resistance जांचने के लिए
Rotterdam Criteria: अंतर्राष्ट्रीय मानक
PCOS की diagnosis के लिए Rotterdam criteria इस्तेमाल होते हैं। इनके अनुसार नीचे दी तीन में से कम से कम दो चीज़ें होनी चाहिए:
- Irregular या absent periods (oligomenorrhoea / amenorrhoea)
- Elevated androgen levels (clinical या blood test से)
- Polycystic ovaries on ultrasound
यानी हर महिला में diagnosis थोड़ी अलग हो सकती है।
PCOD और PCOS की जांच और पूरी प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारा लेख वापी में PCOS टेस्ट पढ़ें।
PCOD और PCOS का इलाज: क्या-क्या विकल्प हैं
PCOD और PCOS का कोई एक “cure” नहीं है, लेकिन इन्हें बहुत अच्छी तरह manage किया जा सकता है। सही इलाज से पीरियड नियमित होता है, fertility बेहतर होती है, और long-term complications का खतरा कम होता है।
1. Lifestyle Changes: सबसे पहला और सबसे ज़रूरी कदम
PCOS management में lifestyle सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। शरीर का सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत वज़न कम करने से भी पीरियड नियमित हो सकते हैं और ओव्यूलेशन बेहतर हो सकता है।
- Low glycemic index (low GI) खाना: चीनी और refined carbs कम करें
- नियमित व्यायाम: रोज़ 30 मिनट walking या yoga
- 7 से 8 घंटे की नींद
- तनाव कम करना
- processed और packaged food से बचाव
2. Medicines: Hormonal और Metabolic दोनों
डॉक्टर की सलाह से ये दवाएं दी जाती हैं:
- Oral Contraceptive Pills (OCP): पीरियड नियमित करने और androgen कम करने के लिए
- Metformin: insulin resistance कम करने के लिए, खासकर जब blood sugar या diabetes का खतरा हो
- Anti-androgen medicines: बाल झड़ने और मुंहासों के लिए
- Ovulation induction: जब प्रेगनेंसी की कोशिश हो (Letrozole, Clomiphene)
3. Fertility Treatment: जब प्रेगनेंसी की ज़रूरत हो
PCOS से प्रेगनेंट होना मुश्किल नहीं, सिर्फ सही guidance चाहिए।
- Ovulation Induction: दवाओं से ओव्यूलेशन trigger करना
- IUI (Intrauterine Insemination): प्राकृतिक तरीके से conceive न होने पर
- IVF (In Vitro Fertilization): जब IUI काम न करे या tubes में समस्या हो
- Laparoscopic Ovarian Drilling: PCOS में ओव्यूलेशन restore करने की surgical procedure
PCOS में गर्भधारण के विकल्पों की पूरी जानकारी के लिए PCOS में गर्भधारण का उपचार पढ़ें।
4. Long-term Health Monitoring
PCOS सिर्फ fertility की समस्या नहीं है। बिना इलाज के यह आगे चलकर Type 2 Diabetes, high cholesterol, heart disease, और endometrial cancer का खतरा बढ़ा सकता है।
PCOS से पीड़ित महिलाओं को नियमित रूप से blood sugar, cholesterol, और blood pressure की जांच करानी चाहिए, भले ही अभी कोई लक्षण न हों।
PCOD और PCOS में क्या खाएं और क्या न खाएं
खान-पान PCOD/PCOS management का सबसे practical हिस्सा है। यह दवाओं जितना ही असरदार हो सकता है।
क्या खाएं
- सब्जियां: खासकर हरी पत्तेदार सब्जियां, broccoli, palak
- साबुत अनाज: brown rice, oats, jowar, bajra
- दालें और legumes: प्रोटीन और fiber दोनों
- मेवे और बीज: अलसी के बीज, कद्दू के बीज, अखरोट (omega-3 के लिए)
- Berries और फल: कम glycemic index वाले
- हल्दी, दालचीनी: inflammation कम करती हैं
क्या न खाएं
- चीनी और मीठे पेय पदार्थ
- Maida से बनी चीज़ें: bread, biscuit, noodles
- Processed और packaged food
- Deep fried चीज़ें
- बहुत ज़्यादा dairy (कुछ महिलाओं में androgens बढ़ा सकती है)
PCOD और PCOS पर अक्सर की जाने वाली गलतियां
कुछ आम गलतियां हैं जो इस स्थिति को और बिगाड़ देती हैं।
- Ultrasound में cysts देखकर operation के लिए राज़ी हो जाना: PCOD/PCOS में cysts surgery से नहीं निकाली जातीं। Operation की ज़रूरत बहुत कम cases में होती है।
- सिर्फ pills लेकर ठीक मानना: Pills लक्षण control करती हैं, असली कारण का इलाज नहीं। Lifestyle change के बिना pills बंद करने पर समस्या वापस आ जाती है।
- बिना जांच के बाज़ारी supplement लेना: Inositol, Vitamin D जैसे supplements कुछ में कारगर हैं, कुछ में नहीं। बिना रिपोर्ट के लेना सही नहीं।
- प्रेगनेंसी की ज़रूरत न हो तो इलाज न करना: PCOS long-term health को प्रभावित करता है, fertility से परे। नियमित monitoring ज़रूरी है।
डॉ. कौशल पटेल की सलाह: वापी और दक्षिण गुजरात की महिलाओं से
“PCOD और PCOS को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ज़्यादातर महिलाएं इसे ‘बस पीरियड की गड़बड़ी’ समझकर नज़रअंदाज़ करती हैं। साल-दो साल बाद जब वे प्रेगनेंट नहीं हो पातीं, तब हमारे पास आती हैं। अगर पहले आई होतीं तो बात बहुत आसान होती।
मैं अपने मरीज़ों को हमेशा यह समझाता हूं कि PCOS कोई बीमारी नहीं है जिससे डरना हो। यह शरीर की एक स्थिति है जिसे समझना और manage करना पड़ता है। सही खान-पान, थोड़ा व्यायाम, और समय पर जांच से बहुत सी महिलाएं बिना IVF के naturally गर्भवती होती हैं।
वापी, वलसाड, दमन, नवसारी, और सिलवासा की महिलाओं के लिए अच्छी खबर यह है कि iSHA में हम हर स्तर की जांच और इलाज एक ही जगह देते हैं। Ultrasound से लेकर hormone testing, ovulation induction से लेकर IVF तक। आपको अहमदाबाद या मुंबई नहीं जाना पड़ेगा।”
डॉ. कौशल पटेल
स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ, IVF Specialist
संस्थापक, iSHA Women’s Hospital & IVF Centre, वापी
12,000+ सफल सर्जरी | 25,000+ परामर्श | 15+ वर्ष का अनुभव
वापी और आसपास की महिलाओं के लिए iSHA में क्या-क्या उपलब्ध है
iSHA Women’s Hospital वापी में PCOD और PCOS की complete care एक छत के नीचे मिलती है।
- Pelvic ultrasound और follicular monitoring
- Complete hormone panel testing
- Insulin resistance और metabolic evaluation
- Ovulation induction और cycle tracking
- IUI, IVF और Laparoscopic treatment
- Diet और lifestyle counselling
- Long-term PCOS monitoring और follow-up
वापी, वलसाड, उमरगाम, दमन, सिलवासा, नवसारी, और भीलाड़ की महिलाएं आसानी से यहाँ आ सकती हैं। पीरियड की कोई भी गड़बड़ी हो, प्रेगनेंसी में देरी हो, या बस एक बार PCOS की जांच करानी हो, किसी भी वजह से आना सही है।
अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए: ishacare.in/book-appointment
पता: 2nd Floor, Raj Complex, D-Mart के पास, Chanod, वापी, गुजरात 396195
Call: +91 94038 91590
सारांश: pcod pcos kya hota hai
PCOD एक हॉर्मोनल स्थिति है जिसमें ovaries में cysts बनती हैं और पीरियड अनियमित होते हैं। PCOS इससे थोड़ा अधिक गंभीर है जिसमें androgen का स्तर भी बढ़ा होता है और fertility, metabolism, और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
दोनों का diagnosis ultrasound और hormone tests से होता है। दोनों का इलाज lifestyle changes, दवाओं, और ज़रूरत पड़ने पर fertility treatment से किया जाता है। दोनों में सही समय पर मदद लेने से नतीजे बहुत बेहतर होते हैं।
अगर आपके पीरियड पिछले 3 महीनों से अनियमित हैं, चेहरे पर अनचाहे बाल आ रहे हैं, वज़न बढ़ रहा है, या प्रेगनेंट होने में दिक्कत आ रही है, तो यह समय है कि एक बार डॉक्टर से मिला जाए।
पीरियड की गड़बड़ी और PCOD के संबंध को और गहराई से समझने के लिए हमारा लेख पीरियड मिस और टेस्ट नेगेटिव: अब क्या करें पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. PCOD और PCOS में कौन ज़्यादा गंभीर है?
PCOS ज़्यादा गंभीर है क्योंकि इसमें androgen का स्तर भी बढ़ा होता है, ओव्यूलेशन ज़्यादा प्रभावित होती है, और long-term में diabetes व heart disease का खतरा होता है। PCOD अपेक्षाकृत manageable है और lifestyle changes से बहुत सुधर सकता है।
2. PCOD में क्या मैं naturally प्रेगनेंट हो सकती हूं?
हां, बहुत सी महिलाएं PCOD होने के बावजूद naturally गर्भवती होती हैं। Weight management, ovulation tracking, और कभी-कभी ovulation induction दवाओं से pregnancy संभव है। PCOS में यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन IUI या IVF से भी संभव है।
3. PCOS का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करने चाहिए?
Pelvic ultrasound, hormone panel (LH, FSH, AMH, Testosterone, Prolactin), thyroid profile (TSH), और insulin/blood sugar test। यह सब मिलकर diagnosis confirm करते हैं। अकेला ultrasound काफी नहीं होता।
4. क्या PCOD/PCOS हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
पूरी तरह “ठीक” नहीं होता, लेकिन सही lifestyle और management से symptoms पूरी तरह control हो सकती हैं। कुछ महिलाओं में weight loss के बाद periods अपने आप regular हो जाते हैं। PCOS को lifelong managed condition के रूप में देखना ज़्यादा सही है।
5. PCOS में periods कितने दिन late हो सकते हैं?
PCOS में period cycle 35 से 90 दिन तक की हो सकती है, और कभी-कभी कई महीनों तक period आता ही नहीं। अगर लगातार 3 महीने period न आए, तो इसे amenorrhea कहते हैं और डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।
6. क्या PCOD teenage लड़कियों को भी हो सकता है?
हां। भारत में 14 से 19 साल की लड़कियों में PCOS की prevalence लगभग 17-18% है। यानी 5 में से लगभग 1 किशोरी। Periods शुरू होने के 2-3 साल बाद भी irregularity हो तो जांच करानी चाहिए।
7. PCOS में वज़न कम करना इतना मुश्किल क्यों होता है?
Insulin resistance की वजह से शरीर fat store करता रहता है और fat burn करना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि PCOS में सिर्फ कम खाने से वज़न नहीं घटता। Low GI diet और regular exercise दोनों मिलकर काम करते हैं।
8. क्या stress की वजह से PCOD बढ़ सकता है?
हां। तनाव से cortisol हॉर्मोन बढ़ता है जो androgen production को और बढ़ाता है और insulin sensitivity को कम करता है। यह PCOS को बिगाड़ता है। इसलिए PCOS management में stress management भी उतना ही ज़रूरी है।
9. क्या PCOS में IVF ज़रूरी है?
ज़रूरी नहीं। PCOS में fertility treatment का पहला कदम ovulation induction है। अगर इससे काम न बने तो IUI, और उसके बाद ज़रूरत हो तो IVF। हर मामला अलग होता है और डॉक्टर जांच के बाद सबसे सही रास्ता बताते हैं।
10. वापी में PCOD और PCOS का इलाज कहाँ मिलेगा?
iSHA Women’s Hospital & IVF Centre, वापी में PCOD और PCOS की complete care उपलब्ध है। Ultrasound, hormone testing, ovulation induction, IUI, IVF, और laparoscopy सब एक ही जगह। अपॉइंटमेंट बुक करें या +91 94038 91590 पर संपर्क करें।



