कई महिलाओं के लिए पीरियड्स एक ऐसी चीज़ बन चुके हैं, जिसके साथ बस एडजस्ट कर लिया जाता है। कभी बहुत तेज दर्द, कभी तारीख़ों का आगे-पीछे होना, कभी ज़्यादा ब्लीडिंग – अक्सर यह सोच लिया जाता है कि यह तो हर महिला के साथ होता है। घर, काम और रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियों के बीच शरीर के इन बदलावों पर ज़्यादा ध्यान ही नहीं जाता।
लेकिन शरीर बिना वजह संकेत नहीं देता। असामान्य पीरियड्स के संकेत अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं और अगर समय रहते समझ लिए जाएँ, तो बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है। मेडिकल स्टडीज बताती हैं कि भारत में प्रजनन आयु की लगभग 20-30% महिलाएं अनियमित पीरियड्स या हार्मोनल असंतुलन से जूझ रही हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वे इलाज नहीं करवातीं। अनियमित माहवारी और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं केवल असहजता नहीं होतीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रहे बदलावों की ओर इशारा भी कर सकती हैं।
यह लेख किसी बीमारी का डर दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि उन 5 रेड फ्लैग्स को समझाने के लिए है, जिन्हें हर महिला को 35 साल से पहले जानना ज़रूरी है।
सावधान! ये 5 लक्षण बताते हैं कि आपके पीरियड्स ‘खतरे’ में हैं
पीरियड्स में होने वाले कुछ बदलाव आम लग सकते हैं, लेकिन हर बदलाव सामान्य नहीं होता। अगर ये 5 लक्षण बार-बार दिखाई दे रहे हैं, तो यह शरीर का संकेत हो सकता है कि अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है।
रेड फ्लैग 1: पीरियड्स में बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या बड़े खून के थक्के
कई महिलाएं ज़्यादा ब्लीडिंग को सामान्य मान लेती हैं, खासकर तब जब पीरियड्स शुरू से ऐसे ही रहे हों। लेकिन –
- अगर हर दो–तीन घंटे में पैड बदलना पड़े, रात में भी बार-बार उठना पड़े या
- खून के थक्के सिक्के से बड़े दिखाई दें
तो यह सामान्य नहीं माना जाता। इसे अक्सर “क्लॉट टेस्ट” कहा जाता है। छोटे थक्के कभी-कभी सामान्य हो सकते हैं, लेकिन बार-बार बड़े थक्के दिखना शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में थकान, चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना भी आम है।
पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग को नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर आयरन की कमी और अनियमित माहवारी जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है। यही कारण है कि इस तरह के असामान्य पीरियड्स के संकेत पर समय रहते ध्यान देना ज़रूरी हो जाता है।
रेड फ्लैग 2: पीरियड्स का अचानक बंद हो जाना या कई महीनों तक न आना
कई बार पीरियड्स का एक–दो महीने देर से आना तनाव, यात्रा या दिनचर्या में बदलाव की वजह से हो सकता है। लेकिन जब पीरियड्स अचानक बंद हो जाएँ या तीन महीने से ज़्यादा समय तक न आएँ, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं होता।
अक्सर ऐसे समय पर सबसे पहले प्रेग्नेंसी का ख्याल आता है, लेकिन हर बार यही वजह नहीं होती।
- हार्मोनल बदलाव,
- अचानक वज़न कम या ज़्यादा होना,
- ज़्यादा मानसिक दबाव या शरीर की थकान भी
इस तरह के असामान्य पीरियड्स के संकेत बन सकते हैं। कई महिलाओं में यही स्थिति आगे चलकर अनियमित माहवारी की शुरुआत भी बन जाती है। पीरियड्स का अचानक बंद हो जाना शरीर का यह तरीका हो सकता है कि वह अंदर चल रही किसी समस्या की ओर ध्यान दिला रहा है।
इसे केवल “थोड़ा स्ट्रेस है” कहकर टालना, पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है।
रेड फ्लैग 3: 21–35 दिन का नियम और बार-बार बदलती तारीख़ें
अक्सर यह मान लिया जाता है कि पीरियड्स हर 28 दिन में ही आने चाहिए। हकीकत यह है कि हर महिला का शरीर अलग होता है और 21 से 35 दिन के बीच का चक्र सामान्य माना जाता है। समस्या तब शुरू होती है, जब यह दायरा बार-बार टूटने लगे।
अगर कभी पीरियड्स 20 दिन में आ जाएँ और कभी 40–45 दिन लग जाएँ, तो यह सिर्फ तारीख़ों का फर्क नहीं होता। ऐसी स्थिति में पीरियड्स अनियमित होना शरीर के संतुलन बिगड़ने का संकेत हो सकता है। कई बार इसे “मौसम बदल गया” या “काम ज़्यादा था” कहकर टाल दिया जाता है, लेकिन लगातार ऐसा होना अनियमित माहवारी की ओर इशारा करता है।
इस तरह के असामान्य पीरियड्स के संकेत यह बताते हैं कि हार्मोन अपने तय तालमेल में काम नहीं कर रहे। समय पर इसे समझ लेना आगे चलकर बड़ी पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं से बचा सकता है।
रेड फ्लैग 4: तेज़ दर्द जिसे “सिर्फ PMS” मान लिया जाता है
कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दर्द होता है, और अक्सर यही कहा जाता है कि यह तो PMS का हिस्सा है। लेकिन जब दर्द इतना तेज़ हो कि बिना पेनकिलर के काम करना मुश्किल हो जाए या स्कूल, कॉलेज और ऑफिस छूटने लगें, तो यह सामान्य नहीं माना जाता।
पीरियड्स में तेज दर्द कभी-कभी शरीर के अंदर चल रहे हार्मोनल असंतुलन के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में पेट के निचले हिस्से के साथ कमर या पैरों में भी दर्द महसूस होता है और हर महीने यही स्थिति दोहराने लगती है। कई महिलाएं इसे सालों तक सहती रहती हैं, क्योंकि दर्द को “औरत होने की कीमत” मान लिया जाता है।
लगातार ऐसा दर्द असामान्य पीरियड्स के संकेत में गिना जाता है और इसे नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है।
दर्द का मतलब हमेशा सहना नहीं होता, बल्कि समझना भी ज़रूरी होता है।
रेड फ्लैग 5: PMS के साथ बार-बार मूड, वज़न और स्किन में बदलाव
पीरियड्स से पहले हल्का चिड़चिड़ापन या थकान महसूस होना कई महिलाओं में देखा जाता है। लेकिन जब हर महीने इसके साथ तेज़ मूड स्विंग्स, अचानक वज़न बढ़ना या घटना, बार-बार मुंहासे और पीरियड्स की तारीख़ों में गड़बड़ी जुड़ जाए, तो इसे केवल PMS कहना सही नहीं होता। ऐसे संकेत कई बार हार्मोनल असंतुलन के लक्षण होते हैं।
कुछ मामलों में यही पैटर्न पीसीओएस के लक्षण की ओर भी इशारा कर सकता है, खासकर तब जब अनियमित माहवारी लंबे समय से चल रही हो। समस्या तब बढ़ती है, जब इन बदलावों को “नॉर्मल हार्मोनल इश्यू” कहकर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है।
इस तरह के असामान्य पीरियड्स के संकेत यह बताते हैं कि शरीर का संतुलन बार-बार बिगड़ रहा है। समय रहते इन्हें समझ लेना पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं बढ़ने से रोक सकता है।
महिलाएं इन संकेतों को क्यों नज़रअंदाज़ कर देती हैं?
अक्सर देखा जाता है कि कई महिलाएं इन बदलावों को गंभीरता से नहीं लेतीं। सबसे बड़ी वजह यही सोच होती है कि “सबके साथ ऐसा ही होता है”। जब आसपास की दूसरी महिलाएं भी दर्द, देरी या ज़्यादा ब्लीडिंग की बात करती हैं, तो असामान्य पीरियड्स के संकेत सामान्य लगने लगते हैं।
एक और कारण तुलना की आदत है। दोस्तों, रिश्तेदारों या सोशल मीडिया पर सुनी अधूरी बातों के आधार पर यह मान लिया जाता है कि समस्या बड़ी नहीं है। कई बार इंटरनेट पर पढ़ी अधूरी जानकारी खुद ही निष्कर्ष निकालने पर मजबूर कर देती है, जिससे अनियमित माहवारी और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं और लंबी चलती रहती हैं।
असल में शरीर हर महिला को अलग तरह से संकेत देता है। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करना आसान है, लेकिन समय रहते समझ लेना ज़्यादा समझदारी भरा कदम होता है।
कब ये पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं डॉक्टर तक ले जानी चाहिए?
हर बदलाव पर घबराने की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जहाँ इंतज़ार करना सही नहीं माना जाता। अगर पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं बार-बार सामने आ रही हों और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर डालने लगी हों, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है।
डॉक्टर से मिलने का समय तब माना जा सकता है जब:
- लगातार तीन महीनों तक पीरियड्स न आएँ
- हर महीने बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या बड़े थक्के दिखें
- दर्द इतना तेज़ हो कि कामकाज प्रभावित होने लगे
- पीरियड्स अनियमित होना लंबे समय से चल रहा हो
- थकान, चक्कर या कमजोरी बार-बार महसूस हो
इन संकेतों का मतलब यह नहीं होता कि कोई गंभीर बीमारी है, बल्कि यह शरीर का तरीका होता है सही समय पर ध्यान खींचने का।
समय पर सलाह लेने से अनियमित माहवारी और दूसरी पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं संभालना आसान हो जाता है।
कहीं ये संकेत अनदेखे तो नहीं रह गए?
पीरियड्स केवल एक मासिक प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि शरीर के अंदर चल रहे संतुलन का आईना भी होते हैं। असामान्य पीरियड्स के संकेत अक्सर हल्के लगते हैं, लेकिन समय रहते समझ लिए जाएँ तो बड़ी परेशानियों से बचाव संभव हो जाता है। अनियमित माहवारी या बार-बार होने वाली पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं शरीर का तरीका होती हैं ध्यान खींचने का।
डरने के बजाय इन संकेतों को समझना और सही समय पर कदम उठाना ही बेहतर स्वास्थ्य की ओर पहला कदम होता है।
अगर इनमें से कोई भी संकेत बार-बार दिखाई दे रहे हैं, तो समय पर सही जाँच और विशेषज्ञ की सलाह कई बार बड़ी परेशानियों को शुरू में ही संभालने में मदद कर सकती है। Isha Hospital & IVF Care में महिलाओं की सेहत को समझकर, हर केस को व्यक्तिगत रूप से देखा जाता है।
चाहे अनियमित माहवारी हो, हार्मोनल असंतुलन या पीरियड्स से जुड़ी दूसरी समस्याएं – सही मार्गदर्शन से स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है।



