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कभी आपको लगा है कि आपका पीरियड अचानक बदल गया है और वजह समझ नहीं आ रही? यह बात अक्सर हर लड़की के मन में आती है। यहाँ एक छोटा सा राज़ है, शरीर कई बातें खुलकर नहीं बताता। वह बस हल्के संकेत भेजता है और कई बार यही संकेत थायराइड के लक्षण होते हैं।

“शरीर बोलता है, बस हमें उसकी भाषा समझनी होती है।”

जब थायराइड धीमा या तेज होता है, तो इसका असर सबसे पहले पीरियड पर दिखता है। यही वजह है कि बहुत सी महिलाएँ पहले अपने चक्र में बदलाव महसूस करती हैं और बाद में पता चलता है कि असली कारण थायराइड और पीरियड के बीच छुपा हुआ रिश्ता था।

अगर आपका चक्र अनियमित हो गया है या शरीर आपको कुछ नया महसूस करा रहा है, तो यह शुरुआत हो सकती है। और इसे समझ लेना ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

थायराइड क्या है और यह आपकी मासिक चक्र को कैसे नियंत्रित करता है?

यह बात आपको जाननी चाहिए कि थायराइड एक छोटा सा ग्रंथि है, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा है। यह शरीर की गति, ऊर्जा, तापमान और कई ज़रूरी प्रक्रियाएँ संभालता है। जब यह संतुलन बिगाड़ता है, तब सबसे पहले असर हार्मोन पर पड़ता है। और हार्मोन बदलते हैं तो मासिक चक्र बदलना तय है।

यहाँ सच यही है कि थायराइड चुपचाप काम करता है। लेकिन जब इसकी गति धीमी या तेज होती है, तो इसका असर हर जगह दिखाई देता है। कई बार महिलाएँ इस थायराइड के लक्षण को साधारण थकान समझ लेती हैं, जबकि असल वजह गहरी होती है। आप यह जानकर हैरान होंगी कि भारत में बड़ी संख्या में महिलाएँ थायराइड की समस्या से जूझ रही हैं। एक हिन्दी स्रोत के अनुसार बड़ी संख्या में महिलाएँ हाइपोथायराइड और थायराइड विकारों से प्रभावित होती हैं।

यह आँकड़ा बताता है कि यह समस्या आम है, लेकिन समझ कम है और जब समझ कम होती है, तो शरीर के संकेत और भी ज़्यादा अनदेखे रह जाते हैं।

थायराइड के लक्षण जो अक्सर पीरियड समस्या की शुरुआत का संकेत होते हैं

बहुत सारी महिलाएँ अपने शरीर में आए छोटे बदलावों को सामान्य समझकर आगे बढ़ जाती हैं पर यही छोटे बदलाव कई बार शुरुआती थायराइड के लक्षण होते हैं। यहाँ सबसे ज़रूरी बात यह है कि ये संकेत धीरे आते हैं और चुपचाप आते हैं। अगर इन्हें समय पर पहचाना जाए, तो मासिक चक्र पर होने वाले असर को रोका जा सकता है।

नीचे कुछ ऐसे शुरुआती संकेत हैं, जिन्हें हल्का समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:

  • कम ऊर्जा रहना: जब थायराइड धीमा होता है, तो शरीर की गति भी धीमी पड़ती है। इससे दिनभर थकान महसूस होती है। ऐसा लगता है कि किसी भी काम की शुरुआत करने की ताकत ही नहीं बची।
  • वजन बढ़ना अचानक: अगर आपका वजन धीरे धीरे नहीं, बल्कि अचानक बढ़ने लगे, तो इसके पीछे थायराइड का असर हो सकता है। शरीर की ऊर्जा प्रक्रिया धीमी पड़ने पर यह बदलाव स्वाभाविक है।
  • चक्कर आना और सुस्ती: यह संकेत अक्सर काम की थकान समझकर छोड़ दिया जाता है। पर जब चक्कर बार बार आएँ या चलते चलते हल्का लड़खड़ापन महसूस हो, तो यह अंदरूनी असंतुलन की ओर इशारा करता है।
  • शरीर का तापमान बदलना: कभी शरीर बहुत ठंडा महसूस होता है, कभी अचानक गरम। यह संकेत भी थायराइड से जुड़ा होता है और धीरे धीरे मासिक चक्र पर असर डालता है।

कई बार महिलाएँ सोचती हैं कि यह सब थायराइड के लक्षण सामान्य है, पर सच यह है कि यही छोटे संकेत आगे चलकर थायराइड और पीरियड के बीच असली बदलाव की शुरुआत बताते हैं। और अगर इन्हें समय रहते समझ लिया जाए, तो आगे होने वाली परेशानियाँ काफी हद तक रोकी जा सकती हैं।

थायराइड और पीरियड का असली रिश्ता: क्या बदलाव सबसे पहले दिखते हैं?

यह बात कई महिलाएँ महसूस करती हैं कि पीरियड पहले की तुलना में अलग होने लगे हैं पर वजह समझ में नहीं आती। सच यही है कि जब शरीर के भीतर थायराइड बदलता है, तो मासिक चक्र सबसे पहले इसका असर दिखाता है। इसलिए थायराइड और पीरियड का बिगड़ना सिर्फ एक छोटी समस्या नहीं है। यह एक संकेत है कि अंदर कुछ महत्वपूर्ण बदल रहा है।

थायराइड शरीर के हार्मोन संतुलन का एक बड़ा हिस्सा संभालता है और जैसे ही यह संतुलन टूटता है, मासिक चक्र भी अपनी लय से हटने लगता है। नीचे कुछ ऐसे बदलाव हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • पीरियड देरी से आना: यह सबसे आम संकेत है। जब थायराइड धीमा पड़ता है, तो शरीर की गति भी धीमी होती है। इसी कारण कई महिलाओं के पीरियड समय से देर आने लगते हैं।
  • पीरियड ज़्यादा भारी या बहुत हल्के होना: कुछ महिलाएँ भारी रक्तस्राव की शिकायत करती हैं, तो कुछ को बहुत हल्का प्रवाह होता है। यह बदलाव थायराइड में आई गड़बड़ी के कारण होते हैं।
  • ओव्यूलेशन पर असर और गर्भधारण में देरी: थायराइड हार्मोन ओव्यूलेशन को नियंत्रित करते हैं। इसलिए इनके बिगड़ने पर ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है, जिससे गर्भधारण में देरी होती है।

आप यह जानकर हैरान होंगी कि हाइपोथायराइड वाली लगभग 20 से 40 प्रतिशत महिलाओं में मासिक चक्र अनियमितता पाई जाती है। यह आँकड़ा बताता है कि थायराइड और पीरियड का संबंध कितना गहरा है और क्यों इसे हल्का नहीं लेना चाहिए।

हाइपोथायराइड होने पर मासिक चक्र क्यों बिगड़ता है? असली वजहें जान लें

बहुत सी महिलाएँ सोचती हैं कि थायराइड और पीरियड में बदलाव सिर्फ तनाव या दिनचर्या से जुड़ा होता है, पर अक्सर इसकी जड़ कहीं ज़्यादा गहरी होती है। जब थायराइड धीमा होता है, तो पूरा शरीर अपनी सामान्य गति खो देता है। यही बदलाव मासिक चक्र तक पहुँचते हैं। यहाँ वे असली थायराइड के लक्षण हैं, जिनके बिगड़ने पर पीरियड को सबसे ज़्यादा प्रभाव होता हैं:

  • शरीर की गति धीमी हो जाना: जब थायराइड धीमा होता है, तो चयापचय की गति भी कम हो जाती है। इससे शरीर को अपने सामान्य काम पूरे करने में ज़्यादा समय लगता है। इसी वजह से चक्र की नियमितता प्रभावित होती है।
  • हार्मोन असंतुलन बढ़ना: थायराइड का सीधा संबंध उन हार्मोन से है जो मासिक चक्र नियंत्रित करते हैं। जैसे ही थायराइड असंतुलित होता है, वही असंतुलन चक्र पर दिखाई देने लगता है।
  • तनाव और नींद पर असर: थायराइड धीमा होने पर नींद की गुणवत्ता बिगड़ती है, तनाव बढ़ता है। यह दोनों बदलाव मासिक चक्र को और ज़्यादा अनियमित कर देते हैं।

यह सच है कि हर महिला इन संकेतों को अलग तरह से महसूस करती है पर इनकी जड़ एक ही होती है इसीलिए कई बार शरीर हमें पहले से चेतावनी देता है, बस हमें उसे समझना होता है।

क्या ये थायराइड के लक्षण आपके शरीर में दिख रहे हैं? खुद की स्थिति को कैसे पहचानें?

कई बार शरीर हमें पहले ही बता देता है कि कुछ बदल रहा है। बस हम समझ नहीं पाते। थायराइड में यही होता है। लक्षण धीरे शुरू होते हैं और कई महिलाएँ इन्हें सामान्य थकान या दिनभर की भागदौड़ समझकर छोड़ देती हैं।

अगर आपके शरीर में नीचे दिए गए संकेत दिख रहे हैं, तो इन्हें हल्के में मत लें, ये शुरुआत हो सकते हैं:

  • हर समय थकान रहना, चाहे नींद अच्छी ली हो: यह थायराइड धीमा होने की सबसे आम निशानी है।
  • पीरियड का समय बदलना या प्रवाह का अलग महसूस होना: अगर आपका चक्र पहले जैसा नहीं रहा, तो यह शरीर द्वारा भेजा गया संकेत है।
  • बार बार चक्कर आना या सुस्ती महसूस होना: यह भी हार्मोन बदलाव का संकेत हो सकता है।
  • वजन बढ़ना, कम ऊर्जा और दिनभर कमजोरी: यह बदलाव धीरे धीरे आते हैं, इसलिए अक्सर अनदेखे रह जाते हैं।

“शरीर अपनी भाषा में सच बोलता है। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या आप उसे सुन पा रही हैं।”

अगर आपको इनमें से कई थायराइड के लक्षण एक साथ महसूस हो रहे हैं, तो यह आपके लिए खुद को समझने का सही समय है। समय रहते पहचान लेना आगे होने वाली बड़ी परेशानी से बचा सकता है।

घरेलू ध्यान और जीवनशैली बदलाव जो थायराइड को शांत रखते हैं

थायराइड में बदलाव होने पर दवा ज़रूरी होती है, लेकिन जीवनशैली का सही ख्याल रखना उतना ही ज़रूरी है। अच्छी बात यह है कि छोटे छोटे बदलाव भी शरीर को बड़ा आराम दे सकते हैं और कई बार यही बदलाव पीरियड की अनियमितता को भी कम कर देते हैं।

नीचे कुछ सरल आदतें हैं जिन्हें आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल कर सकती हैं:

  • आयोडीन संतुलन की भूमिका: आयोडीन की कमी थायराइड पर सीधा असर डालती है। संतुलित मात्रा में आयोडीन वाला भोजन शरीर को स्थिर रखता है।
  • नियमित नींद और तनाव कम करना: थायराइड और नींद का रिश्ता गहरा है। समय पर सोना और तनाव कम रखना हार्मोन को स्थिर रखता है।
  • हल्का व्यायाम और पानी की मात्रा सही रखना: नियमित हल्की चाल, योग या साधारण स्ट्रेचिंग शरीर को सक्रिय रखती है। पानी की सही मात्रा भी थायराइड पर सकारात्मक असर डालती है।

कई बार महिलाएँ सोचती हैं कि बड़े बदलाव करने होंगे। पर सच यह है कि छोटे कदम भी बड़ा फर्क डालते हैं और जब शरीर शांत होता है, तो मासिक चक्र भी अपनी लय में लौटने लगता है।

डॉक्टर से कब मिलना ज़रूरी है? ये संकेत बिल्कुल न अनदेखा करें

थायराइड धीरे शुरू होता है, लेकिन समय के साथ इसका असर बढ़ता जाता है। कई महिलाएँ शुरुआत में इसे हल्का मानकर टाल देती हैं, लेकिन यही देरी आगे बड़ी परेशानी बन सकती है। इसलिए कुछ थायराइड के लक्षण बढ़ने के संकेत ऐसे हैं, जिन्हें दिखते ही डॉक्टर से बात करना ज़रूरी है-

  • लंबे समय तक पीरियड देर से आना या बिल्कुल न आना: अगर आपका चक्र लगातार बिगड़ रहा है, तो यह सिर्फ हार्मोन का उतार चढ़ाव नहीं है। यह शरीर की ओर से साफ चेतावनी है।
  • बहुत तेज थकान, कमजोरी और कम ऊर्जा महसूस होना: जब ये लक्षण तीन से चार हफ्ते तक बने रहें, तो यह थायराइड असंतुलन की ओर इशारा करते हैं।
  • वजन लगातार बढ़ना और चक्कर बार बार आना: यह बदलाव कई बार अचानक शुरू होते हैं और यह संकेत देते हैं कि अंदर कुछ गड़बड़ है।

भारत में बड़ी संख्या में महिलाएँ थायराइड के लक्षण महसूस करने के बावजूद देर से जांच करवाती हैं। यह देरी समस्या को बढ़ा देती है। अगर आपको लगता है कि शरीर लगातार संकेत दे रहा है, तो मदद लेने में देर न करें। कई बार एक छोटी सी जांच आगे बड़ी परेशानियों से बचा सकती है।

निष्कर्ष: आपका शरीर संकेत दे रहा है, उसे अनसुना मत करें

आपका शरीर हमेशा आपको पहले ही बता देता है कि कहाँ कुछ बदल रहा है। बस हम रोज़मर्रा की थकान और भागदौड़ में उन संकेतों को सुन नहीं पाते। यही वजह है कि थायराइड के लक्षण अक्सर शुरू में हल्के लगते हैं, लेकिन धीरे धीरे मासिक चक्र पर असर डालते हैं।

बहुत सी महिलाएँ पीरियड बदलने को अलग समस्या समझ लेती हैं, जबकि असली वजह कई बार थायराइड और पीरियड का गहरा रिश्ता होता है। अच्छी बात यह है कि जैसे ही आप इन संकेतों को समय रहते पहचान लेती हैं, आगे होने वाली बड़ी परेशानियाँ कम हो सकती हैं।

“शरीर समय से पहले चेतावनी देता है। बस उस चेतावनी को गंभीरता से लेना सबसे बड़ी समझदारी है।”

अगर आपके चक्र में बदलाव आ रहा है, या शरीर आपको लगातार थकान और कमजोरी का संकेत दे रहा है, तो इसे हल्का न समझें।
एक छोटी जाँच आपके लिए बड़ा अंतर ला सकती है। थायराइड को समझना और समय पर संभाल लेना आगे चलकर आपके चक्र और आपके स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित रखता है।

मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल थायराइड के लक्षण एवं थायराइड और पीरियड के संबंध में सामान्य जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह की बीमारी, समस्या या लक्षण के लिए अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। यह लेख किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।

Frequently Asked Questions
थायराइड बढ़ने पर पीरियड क्यों लेट होते हैं?
थायराइड धीमा होने पर शरीर की गति कम हो जाती है। इससे हार्मोन प्रभावित होते हैं और पीरियड समय से देर आने लगते हैं। यह बदलाव शुरू में हल्का लगता है, लेकिन समय के साथ चक्र को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।
क्या हाइपोथायराइड में गर्भधारण मुश्किल हो जाता है?
हाँ, क्योंकि थायराइड हार्मोन ओव्यूलेशन को नियंत्रित करते हैं। इनके असंतुलित होने पर ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और गर्भधारण में देरी हो सकती है।
क्या थायराइड के लक्षण सिर्फ थकान तक सीमित होते हैं?
नहीं, कई बार वजन बढ़ना, कम ऊर्जा, चक्कर आना, नींद प्रभावित होना और पीरियड बदलना भी इसका संकेत होते हैं। यह सिर्फ थकान नहीं, बल्कि हार्मोन संतुलन में बदलाव होता है।
थायराइड की जाँच कब करवानी चाहिए?
अगर थकान, चक्कर, वजन बढ़ना, कम ऊर्जा और पीरियड में लगातार गड़बड़ी तीन से चार हफ्ते तक बनी रहे, तो जांच करवाना सही समय है।
क्या वजन बढ़ना थायराइड के लक्षण का संकेत हो सकता है?
हाँ, विशेष रूप से जब वजन बिना वजह बढ़ने लगे। यह शरीर की ऊर्जा प्रक्रिया धीमी होने का संकेत है, जो थायराइड में आम है।